यादव कुल में एकता के अंकुर की अकुलाहट

पूरे देश में चल रही मोदी की आंधी का असर कहे या लोकसभा चुनाव के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती से मिले कड़वे सबक का नतीजा कि अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और संप्रग अध्यक्ष शिवपाल यादव को फिर पारिवारिक एकता याद आने लगी है. कल तक एक-दूसरे को फूंटी आंख न सुहाने वाले चाचा-भतीजे को एक बार फिर परिवार की एकता की फिक्र होने लगी है.चाचा शिवपाल ने जहां मैनपुरी में कहा कि कुछ षड़यंत्रकारी लोग परिवार की एकता में बाधक है और उनकी तरफ से सुलह की पूरी गुंजाइश है. तो इधर लखनऊ में भतीजे अखिलेश ने भी चाचा को निराश नहीं किया. अखिलेश ने कहा कि सबके लिए दरवाजे खुले है, जो आना चाहे, आ सकता है. आंख बंद करके पार्टी में शामिल कर लेंगे.

दरअसल पूरे देश में चल रही बीजेपी की प्रचंड आंधी का मुकाबला करने के लिए अब विपक्षी दलों ने अपनी रणनीतियां बदलनी शुरू कर दी है. यूपी में आगामी विधानसभा उपचुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए ही अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल ने एक बार फिर साथ आने के संकेत दिए है. लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव दोनों के सामने अपने-अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की चुनौती है. यही वजह है कि दोनों के बीच जमी कड़वाहट की बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है. हालांकि खुलकर न तो अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव का नाम लिया और न ही शिवपाल ने षड्यंत्रकारी के तौर पर किसी का नाम लिया. ऐसे में अब देखना यह है कि क्या चाचा-भतीजे अपने-अपने सारे गिले शिकवे भुलाकर एक होंगे? या नहीं.